23 जुलाई 2020 गुरुवार

देश के स्थापित बैंको में से एक एक्सिस बैंक काफी समय से अपने उपभोगताओं से एक फार्म को भरने के लिए कह रहा है जिसमें पूछा जा रहा है कि “क्या आप क्रिप्टो ट्रेडिंग में लेनदेन कर रहे हैं”?
ट्विटर पर एक्सिस बैंक के बहुत से उपभोक्ता इस तरह की शिकायतें कर रहे हैं।

यह पूछने का अधिकार एक्सिस बैंक को किसने दिया यह नहीं पता लेकिन हम इतना जरूर जानते हैं कि भारत का कोई भी बैंक रिज़र्व बैंक के अधिकार क्षेत्र में आता है और हर बैंक को रिज़र्व बैंक के नियम और आदेशों को मानना पड़ता है।कुछ समय पहले रिज़र्व बैंक ने एक RTI के जवाब में यह साफ साफ कहा है कि किसी भी क्रिप्टो एक्सचेंज या क्रिप्टो ट्रेडर को बैंक का इस्तेमाल करके क्रिप्टो लेनदेन पर अभी तक कोई रोक नहीं है।इसके बाद भी अगर एक्सिस बैंक ऐसा कर रहा है तो यह उपभोगता अधिकार का उलंघन है क्या एक्सिस बैंक के ऊपर इसके लिए कार्यवाही हो सकती है ?क्या ऐसा हो सकता है कि बैंक के पास कोई ऐसा अधिकार हो ?अगर एक्सिस बैंक के पास इस तरह का कोई अधिकार है तो हमें भी बताए ताकि हम आने ज्ञान को बढ़ा सकें साथ ही अपने पाठकों को भी इस बारे में बता सकें।
2017 में रिज़र्व बैंक ने क्रिप्टो के लेनदेन के लिए बैंक एकाउंट का इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी थी और इसके बाद बहुत सी याचिकाएं उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में आई थी ,बाद में यह सब सर्वोच्च न्यायालय में गई और काफी लंबी अवधि के बाद मार्च 2020 में यह फ़ैसला क्रिप्टो के पक्ष में आया जिसमें इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की मुख्य भूमिका रही थी।इस आदेश के बाद रिज़र्व बैंक की रोक क़ानूनी तौर पर ख़ारिज हो गई थी।यह होने के बाद भी अगर एक्सिस बैंक ऐसा कर रहा है तो यह हैरानी ही बात है की एक बैंक सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के विरुद्ध काम कर रहा है।
ऐसी ही कुछ शिकायत कोटक बैंक के उपभोगता भी कर रहे हैं।
बैंक शायद यह भूल जाते हैं कि उपभोगताओं के निवेश और जमा किये गए पैसों से ही बैंक चलते हैं और उपभोगता चाहें तो वह बैंक से अपने निवेश को वापिस भी ले सकते हैं।
हम जनता के प्रतिनिधि होने के नाते एक्सिस बैंक से यह पूछना चाहते हैं कि वह हमें यह बताने का कष्ट करें कि किस अधिकार से वह उपभोगताओं से यह जानकारी मांग रही है कि वह क्रिप्टो में ट्रेड करता है या नहीं ?

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