05 अगस्त 2022 शुक्रवार (क्रिप्टो न्यूज़ हिंदी)

पिछले दिनों रिज़र्व बैंक के गवर्नर ने बहुत बल दे कर यह कहा था कि क्रिप्टो पर पूरी तरह से प्रतिबन्ध लगना चाहिए क्योंकि यह देश की मुद्रा और अर्तव्यवस्था के लिए खतरनाक है। सरकार भी जब क्रिप्टो के बारे में अपना पक्ष रखती है तो वह अक्सर यह कहती है कि क्रिप्टो गैरकानूनी काम के लिए इस्तेमाल होती है और इस से आतंकवाद को फंडिंग होती है। रिज़र्व बैंक और सरकार दोनों ही यह बातें बिना किसी आधार के कहते हैं। अगर क्रिप्टो किसी देश के लिए आर्थिक या आतंकी तौर पर खतरा होती तो भारत से ज्यादा मजबूत मुद्रा वाले देश अपने देश में क्रिप्टो के इस्तेमाल पर बहुत पहले ही रोक लगा देते, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। आज भारत से ज्यादा आतंकी खतरा बाकि देशों पर है, मुख्यता अमेरिका और योरोप हमेशा से ही इस सूचि में सबसे ऊपर रहे हैं। सिंगापुर और दुबई जैसे छोटे छोटे देशों ने भी क्रिप्टो और इस से जुड़े भविष्य को समझते हुए अपने अपने देश में क्रिप्टो के इस्तेमाल पर कानून और नियम बनाए हैं।

भारत में रिज़र्व बैंक क्रिप्टो पर प्रतिबन्ध लगाने के पीछे जो तर्क दे रहा है, वह हास्यपद है। क्रिप्टो या बिटकॉइन से किसी देश की मुद्रा को कोई खतरा नहीं हो सकता। कोई भी देश या उसके 100% नागरिक क्रिप्टो से लेनदेन के लिए कभी तैयार नहीं हो सकते। रिज़र्व बैंक और सरकार खुद यह मानते हैं कि क्रिप्टो की कीमत में बड़े उतार चढ़ाव होते हैं। ऐसी उतार चढ़ाव वाली चीज़ से कोई लेनदेन के लिए कभी तैयार नहीं होगा और अगर होगा भी तो वह बहुत ही कम संख्या में होगा। रिज़र्व बैंक और सरकार की क्रिप्टो से समस्या है जनता के अधिक निवेश का इस तरफ आना। कोरोना के समय से क्रिप्टो में भारतीय जनता का निवेश बहुत ज्यादा बढ़ा है। 2017 से ही भारतीय निवेशक ने क्रिप्टो में निवेश शुरू कर दिया था जो 2021 में बहुत ज्यादा बढ़ गया। लोग शेयर बाजार, म्यूचल फण्ड और बैंक में पैसा रखने की जगह क्रिप्टो में निवेश को ज्यादा बेहतर समझते हैं। बैंक और सरकार को यही डर है कि क्रिप्टो में ज्यादा पैसा गया तो शेयर बाजार और बैंक निवेश को ज्यादा नुकसान होगा और इसी लिए सरकार क्रिप्टो से लोगों को हटाना चाहती है।

सरकार सीधे तौर पर क्रिप्टो पर प्रतिबन्ध नहीं लगा सकती। इसके भी दो कारण हैं। पहली बात तो यह है कि रिज़र्व बैंक कि सर्वोच्च न्यायालय में हुई हर से सरकार ने काफी कुछ सीखा है, इसके साथ ही अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी सरकार नहीं चाहेगी कि सरकार को शर्मिंदा होना पड़े। भारत G20 का एक मजबूत सदस्य है और क्रिप्टो पर बाकि देशों का रुख भारत से अलग है। अब सरकार के पास भारत के निवेशकों को क्रिप्टो से हटाने का एक ही तरीका था और वह था सबसे ज्यादा टैक्स लगाना। सरकार ने यह भी कर दिया लेकिन क्रिप्टो निवेशकों पर इतना ज्यादा टैक्स क्रिप्टो समुदाय को सही नहीं लगा और यह सही है भी नहीं। सरकार ने अनजाने में ही क्रिप्टो निवेशकों को अपनी क्रिप्टो कमाई को छुपाने पर मजबूर किया है।

सरकार और रिज़र्व बैंक आज तक तथ्यों के साथ यह नहीं बता पाया है कि क्रिप्टो से देश की मुद्रा और अर्थव्यवस्था को खतरा कैसे है ? अगर क्रिप्टो से आतंक को फंडिंग की बात करें तो आज तक शायद ही भारत में कोई ऐसा आतंकी हमला हुआ है जहां पर क्रिप्टो से फंडिंग की गयी हो। यहाँ तक की विश्व में भी शायद ही कभी यह देखने को मिला हो। नशीले पदार्थो की तस्करी में भी आजतक भारत में कभी क्रिप्टो नहीं पकड़ी गयी है। विदेशो में ऐसा हो सकता है। पिछले कुछ दिन से लगातार सरकारी मंत्रियो के घर से बहुत बड़ी तादाद नकद रुपया मिल रहा है। हर दिन बैंक से रुपयों की लूट की खबरे आ रही है। यह रुपया देश के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

कल ही जम्मू में हवाला के करीब 2 करोड़ रुपयों के साथ एक व्यक्ति को पुलिस ने पड़ा है और एक की जान चली गयी। इसके पास से बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ भी मिले हैं। बताया यह जा रहा है कि यह पैसा कश्मीर में आतंकियों को पहुंचाया जाना था और इसका इस्तेमाल 15 अगस्त के दिन देश में धमाके करना था। अब सरकार या रिज़र्व बैंक इसके बारे में क्या कहेगा ? क्या रूपये पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए कोई बोलेगा ? ऐसा नहीं हो सकता और होना भी नहीं चाहिए। रूपये और क्रिप्टो में कुछ भी गलत नहीं है लेकिन कुछ लोग इनका इस्तेमाल गलत कामों के लिए करते हैं। ऐसे में सरकार को यह नियम बनाने चाहिए कि, अगर कोई भी क्रिप्टो का गलत इस्तेमाल करता है तो उसे सजा होगी। अगर ऐसे में हम यह कहें कि क्रिप्टो बंद करने से आतंकवाद बंद होगा तो यह सही नहीं है, आतंकवादियों या गैरकानूनी काम करने वालो के लिए किसी देश की मुद्रा ज्यादा बेहतर और आसान विकल्प है।

किसी भी देश का नागरिक अपनी पूंजी को बढ़ाने के लिए कही भी निवेश कर सकता है, लेकिन इस से देश को कोई नुकसान नहीं होना चाहिए। रही बात निवेशक के नुकसान कि तो यह उसका निजी जोखिम है। सेबी क्या शेयर बाजार में निवेशक के पैसे न डूबने की जिम्मेवारी ले सकती है ? जवाब है नहीं, निवेश में मुनाफा और नुकसान दोनों है। सेबी जैसी संस्था निवेशक के हितों की रक्षा कर सकती है। सरकार को क्रिप्टो क्षेत्र के लिए भी नियम व कानून बनाने चाहिए और इसका उन्लंघन करने वालो को दंड भी देना चाहिए। जो लोग इस क्षेत्र में बेहतर काम कर रहे हैं उन्हें तो सरकार और रिज़र्व बैंक को सहयोग करना चाहिए। सरकार के सहयोग से इस क्षेत्र में और जुडा उन्नति होगी। देश का हुनर विदेशों में नहीं जाएगा। देश में क्रिप्टो से FDI आने से रिज़र्व बैंक को भी फायदा होगा। ऐसे में सरकार को क्रिप्टो के विषय में दूरदर्शिता के साथ सोचना चाहिए और सही नियम और कानून बनाने चाहिए।

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