30 सितम्बर 2020 बुधवार

किसी भी प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए दो आधारभूत जरूरतें होती हैं, पहली वह तकनीक जो कोई प्रोजेक्ट ला रहा है और इसकी सफलता निर्भर करती है की वह तकनीक कौन सी समस्या का समाधान दे रही है और दूसरा आर्थिक मजबूती जो उस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए जरुरी है।

आज क्रिप्टो और ब्लॉकचेन बाजार में DeFi का राज है और रोज़ाना बेहतर से बेहतर प्रोजेक्ट बाजार में आ रहे हैं।इन प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए और दुनिया के हर एक व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए बहुत बड़ी आर्थिक सहायता की जरुरत पड़ती है। 2017 -2018 में बहुत से प्रोजेक्ट बाजार में आए और इन्होनें अपने प्रोजेक्ट के लिए पैसा इकठ्ठा करने के लिए ICO का सहारा लिया और यह हम सब जानते हैं की ज्यादातर ICO कामयाब नहीं हो पाए। इसके पीछे एक बहुत बड़ा कारण है और वह है निवेशक,वह निवेशक जिन्होंने इन प्रोजेक्ट्स में निवेश किया।ICO निकालने वाली कंपनियों ने बाजार में आम निवेशक पर भरोसा किया जो इन कंपनियों का गलत निर्णय था।कंपनियों ने अपने टोकन को बाजार में लाने के लिए जो शुरुआत करी उसी में इनके असफल होने की कहानी लिखी है।दरअसल टोकन को बाजार में उन निवेशकों को दिया गया जो इस क्षेत्र की बहुत कम या कहे की बिल्कुल भी जानकारी नहीं रखते थे। यह लोग बाजार में केवल टोकन को खरीद कर अधिक कीमत पर बेचने तक की ही जानकारी रखते थे।ICO के कई चरण होते थे जिसमें सबसे पहले चरण में सबसे कम कीमत पर टोकन दिया जाता था और इसके बाद हर चरण में टॉकन की कीमत बढ़ा दी जाती थी।आमतौर पर शुरू के चरण में ख़रीदा गया टोकन अंतिम चरण में निवेश को 8 से 10 गुना बढ़ा देता था और एक निवेशक का निवेश अगर दो से तीन महीने में 10 बढ़ेगा तो वह इसे बेचेगा ही इसमें कोई दोराय है ही नहीं। यही हुआ ICO के साथ,जैसे ही टोकन एक्सचेंज पर आया लोगों ने इसे बेचना शुरू कर दिया और टोकन की कीमत गिरती चली जाती थी ऐसे में टोकन की कीमत को सँभालने के लिए कम्पनी आती थी और जो निवेश प्रोजेक्ट में लगना चाहिए था वह ट्रेड में ही खत्म हो जाता था और प्रोजेक्ट फेल हो जाते थे।

DEFI प्रोजेक्ट ने यह काम नहीं किया।यह तो हम सब जानते हैं की कोई भी ब्लॉकचेन आधारित प्रोजेक्ट का एक गवर्नेस टोकन होता है जो उस प्रोजेक्ट की ब्लॉकचेन पर काम करने के लिए इस्तेमाल होता है और प्रोजेक्ट्स इन्ही टोकन से अपने लिए फंड्स इकठ्ठा करते हैं।इन टोकन को बाजार में देने के लिए हर एक प्रोजेक्ट की अपनी रणनीति होती है की कितना टोकन प्राइवेट सेल में दिया जाएगा,कितना पब्लिक सेल में,कितना मार्केटिंग के लिए और कितना लॉक रखा जाएगा।आज defi प्रोजेक्ट बाजार में अपने टोकन को लाने से पहले प्राइवेट सेल में अपने कुछ प्रतिशत टोकन को देते हैं और यहीं से defi की स्थिर सफलता शुरू होती है क्योंकि इस प्राइवेट सेल में निवेश करने वाले आम निवेशक न हो कर क्रिप्टो या आर्थिक क्षेत्र के बहुत ही स्थापित निवेशक होते हैं।यह निवेश बहुत बड़ा निवेश इन प्रोजेक्ट में करते हैं और क्योंकि यह लोग आर्थिक तौर पर बहुत मजबूत होते हैं तो टोकन की कीमत कई गुणा होने पर भी यह इन टोकन को बेचने के बारे में नहीं सोचते।साथ ही यह अपनी दूरदृष्टि से यह देख पाते हैं की जिस प्रोजेक्ट में वह निवेश कर रहे हैं वह प्रोजेक्ट किस स्तर तक सफल हो सकता है। प्राइवेट सेल में यह भी एक मुख्य शर्त होती है की शुरू के निवेशक एक निश्चित समय तक अपने टोकन को बेच नहीं सकते।यह कारण है की प्रोजेक्ट के पास आए हुए निवेश को प्रोजेक्ट अपने लक्ष्यों तक पहुंचने में लगता है और प्रोजेक्ट के पास धन का आभाव नहीं होता।एक उचित समय पर टोकन को पब्लिक के लिए उपलब्ध करवाया जाता है जहां पर मक्सद पैसा इकठ्ठा करना नहीं होता बल्कि टोकन को बाजार में उपलब्ध करवाना होता है ताकि प्रोजेक्ट की ब्लॉकचेन को इस्तेमाल करने के लिए गर्वनेस टोकन बाजार में एक्सचेंज से ख़रीदा जा सके।इस रणनीति के कारण ही टोकन की कीमत एकदम निचे नहीं गिरती और जैसे जैसे प्रोजेक्ट आगे बढ़ता है वैसे वैसे संतुलित तरीके से टोकन की कीमत भी आगे बढ़ती है।इस में प्राइवेट सेल में जिन निवेशकों ने अपना निवेश लगाया है उनको भी भरोसा रहता है की प्रोजेक्ट सही दिशा में आगे जा रहा है और उनका निवेश सुरक्षित होने के साथ साथ बढ़ भी रहा है।

हमारी गलतियां हमें शिक्षा देती हैं उन गलतियों को न दोहराने की और भविष्य में बेहतर योजना पर काम करने की और यही क्रिप्टो और ब्लॉकचेन की दुनिया में आज हो रहा है जहां पर defi प्रोजेक्ट्स ने ICO की गलतियों से शिक्षा ली और आज प्राइवेट सेल में स्थिर निवेशक को अपना टोकन दे कर प्रोजेक्ट को उनके लक्ष्यों तक पहुंचाया जा रहा है और यह सफल भी हो रहे हैं। आम निवेशक को भी इन बातों को ध्यान में रखना चाहिए और निवेश को अच्छे प्रोजेक्ट में लगाना चाहिए और फिर इंतज़ार करना चाहिए अपने निवेश को बढ़ने के लिए। निवेशक बनना एक कला है और इसे सीखने में समय लगता है,अगर आप भी एक अच्छा निवेशक बनना चाहते हैं तो दूरदर्शिता अपनाएं।
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