13 सितम्बर 2021 सोमवार

भारत के मुख्य मीडिया हाउस इंडियन एक्सप्रेस औरफाइनेंशियल टाइम्स ने बीते गुरुवार एक सेमिनार का आयोजन किया था जहां पर रिज़र्व बैंक के गवर्नर श्री शक्तिकांत दास भी मौजूद थे।शक्तिकांत जी का कहना है की “केंद्रीय बैंक बिटकॉइन और क्रिप्टो को ले कर “गंभीर और प्रमुख”तौर पर चिंतित है और इस बारे में वह सरकार को भी अवगत करवा चुकी है”।याद रखने वाली बात की एक रिपोर्ट के अनुसार रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया अपनी डिजिटल मुद्रा को भी इस वर्ष के अंत तक लाने पर काम कर रही है।

श्री शक्तिकांत दास का कहना है की रिज़र्व बैंक सरकार को अपने विचार क्रिप्टो के बारे में बता चुकी है और इस बारे में आखरी फैसला सरकार को लेना है।दास ने कहा है कि “भारतीय रिज़र्व बैंक बिटकॉइन और क्रिप्टो के बारे में बहुत ही विश्वसनीय व्याख्या चाहता है कि यह (क्रिप्टो और बिटकॉइन)भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कैसे फायदेमंद है”?

श्री शक्तिकांत दास के द्वारा कही गयी बातों से एक संतुष्टि तो मिलती है कि,सरकार बिटकॉइन और क्रिप्टो के प्रति उदासीन नहीं है और आज भी इस बारे में विचार कर रही है।अब अगर हम यह बात करें कि रिज़र्व बैंक इस बारे में और समझना चाहती है तो इसके लिए रिज़र्व बैंक को सबसे पहले उन सभी बात को पढ़ना चाहिए जो सर्वोच्च न्यायालय में क्रिप्टो बनाम रिज़र्व बैंक के मुकदमे में बताई गई थी।इस केस के दौरान क्रिप्टो की तरफ से अपना पक्ष रखने वाले वकीलों ने बहुत बेहतर तरीके से क्रिप्टो का विषय सर्वोच्च न्यायालय को समझाया था।इसके बाद ही सभी बातों को समझने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने क्रिप्टो के पक्ष में अपना फैसला दिया था।

मार्च 2020 में सर्वोच्च न्यायालय ने क्रिप्टो के पक्ष में फैसला देने के बाद सरकार क्रिप्टो के बारे में कुछ नियम बनाने वाली थी जिसके लिए सरकार ने एक कमेटी भी बनाई थी,वह अपनी रिपोर्ट सरकार को दे चुकी है।इस विषय में कई बार वित्तीय मंत्री अपना पक्ष बता चुके हैं और कह चुके हैं कि वह (सरकार)क्रिप्टो पर पूरी तरह से प्रतिबन्ध लगाने के बारे में नहीं सोच रहे हैं।सरकार इस विषय में बहुत सोच समझ कर कोई फैसला लेना चाहती है।शायद यही कारण है कि रिज़र्व बैंक भी इस विषय पर और जानकारी चाहता है।

बेहतर तो यह होगा कि इंडियन एक्सप्रेस और फाइनेंशियल टाइम्स,रिज़र्व बैंक के अधिकारियों और क्रिप्टो कि जानकारी रखने वाले लोगों का एक सम्मेलन आयोजित करे।इस तरह के सम्मेलन में सरकार के अधिकारी अपने सभी प्रश्नों को क्रिप्टो जानकारों से पूछ सकते हैं और अपने दिमाग के सभी सवालो का जवाब ले सकते हैं।हमें यह याद रखना चाहिए कि अमेरिका के एल साल्वाडोर जैसे देश ने भी विशषज्ञों से जानकारी ले कर बिटकॉइन को अपने देश का लीगल टेंडर बनाया है।बिना विशेषज्ञों की जानकारी के सही नियम नहीं बनाए जा सकते हैं।

आज अगर रिज़र्व बैंक या सरकार यह समझना चाहती है कि क्रिप्टो से भारतीय अर्थवयवस्था को कैसे फायदा हो सकता है तो पिछले दो साल जब से कोरोना शुरू हुआ है तब से अब तक क्रिप्टो की ग्रोथ देखनी चाहिए।रिज़र्व बैंक को क्रिप्टो एक्सचेंज के डेटा और उन पर होने वाली ट्रेड वॉल्यूम को देखना चाहिए।अगर बिटकॉइन और क्रिप्टो से भारतीय अर्थव्यवस्था को फायदे की बात है तो पिछले दो साल में भारतीय ब्लॉकचेन और क्रिप्टो प्रोजेक्ट्स ने जितनी नौकरियां दी है उन्हें देखना चाहिए।आज भारत के क्रिप्टो प्रोजेक्ट जिस तरह से काम कर रहे हैं वह बिना किसी सरकारी मदद और दिशा निर्देश के हैं।अगर सरकार क्रिप्टो प्रोजेक्ट्स को सहयोग करें तो इस से अर्थव्यवस्था को तो फायदा होगा ही लेकिन सबसे बड़ी बात है कि इस क्षेत्र से रोजगार की बहुत बड़ी संभावनाएं हैं।

वैसे अगर हम यह देखे कि रिज़र्व बैंक के अधिकारी बहुत बुद्धिजीवी और अर्थव्यवस्था को समझने वाले होते हैं।ऐसे में जहां भारत में पीछे चार पांच साल से क्रिप्टो और रिज़र्व बैंक के बीच एक शीत युद्ध चल रहा है,क्या हम यह मान सकते हैं कि इन अधिकारियों ने क्रिप्टो को समझा नहीं होगा?क्या इन्होंने सिर्फ क्रिप्टो से होने वाले नुकसान को देखा इस से होने वाले फायदों पर इनका ध्यान नहीं गया?बात यह है कि मीडिया कॉन्फ्रेंस में किसी प्रश्न के जवाब में कुछ तो कहना ही होता है तो हम यह कह देते हैं कि हम इनकी संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं।अगर रिज़र्व बैंक क्रिप्टो से भारतीय अर्थव्यवस्था को क्या फायदा हो सकता है यह समझना चाहते हैं तो वह इसके लिए क्या कर रहे हैं ?क्या इसके लिए उन्होंने क्रिप्टो विशेषज्ञों से बात कि और समझना चाहा?अगर रिज़र्व बैंक अभी यह समझा ही नहीं हैं तो सरकार को राय कैसे दे दी ?

भारत में क्रिप्टो पर कानून बनने में अभी समय लगेगा और साथ ही सरकार को इस बारे में बहुत कुछ समझना भी होगा।क्रिप्टो के फायदे और नुक्सान,दोनों को सही तरीके से समझने के बाद ही सही कानून बन सकता है।जल्दबाज़ी में लिया गया निर्णय भारत को इस तकनीक में बहुत पीछे धकेल सकता है।

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