29 मई 2021 शनिवार (दिल्ली)

किसी भी देश का केंद्रीय बैंक उस देश की अर्थव्यवस्था का दिल होता है और यह जितना मजबूत होगा देश आर्थिक तौर पर उतना ही मजबूत होगा।केंद्रीय बैंक को यह आर्थिक मजबूती देश से ही मिलती है जब देश में रहने वाले अपनी कमाई से टैक्स देते हैं।एक देश में रहने वाला नागरिक केंद्रीय बैंक की बनाई गयी मुद्रा को मानता है, तभी इस मुद्रा की कोई कीमत होती है वरना तो यह एक कागज मात्र है।

भारत देश में रिज़र्व बैंक एक बहुत मजबूत सरकारी संस्था है जो देश में वित्य मामलों जैसे मुद्रा को विकसित करना,बैंको को संचालित करना व निवेश के लिए सही नियम बनाना और साथ ही यह भी देखना की जनता का निवेश सुरक्षित रहे और इसी लिए रिज़र्व बैंक समय समय पर निवेश से सम्बंधित दिशा निर्देश व चेतावनी भी जारी करता रहता है।ऐसी ही एक चेतावनी रिज़र्व बैंक ने एक ऐसे निवेश के बारे में जारी की है जो की पूरी तरह से सरकारी मान्यता प्राप्त है साथ ही यह देश की अर्थव्यवस्था का भी मुख्य भाग है।हम बात कर रहे हैं शेयर बाजार की !रिज़र्व बैंक ने पिछले दिनों एक चेतावनी जारी की है जिसके अनुसार “पिछले एक साल में शेयर बाजार में जो तेज़ी आई है यह सही नहीं है और यह बुलबुला कभी भी फट सकता है”।

इस खबर को कई समाचार पत्रों में मुख्यता से प्रकाशित किया है।खबर का शीर्षक है “आर्थिक सुस्ती में शेयर बाजार की ऐसी चुस्ती ठीक नहीं “आरबीआई।इस बात के पीछे रिज़र्व बैंक का तर्क है की पिछले एक साल में कोरोना के कारण देश और उद्योग का बहुत बुरा हाल हुआ है और व्यापार बंद होने के कारण कंपनियों को मुनाफा नहीं हुआ है साथ ही उद्योगिक क्षेत्र बहुत बड़े नुकसान में है।ऐसे में शेयर बाजार ने इसी महामारी के दौरान 21 जनवरी 2021 को भारतीय शेयर बाजार ने 50000 के स्तर को छुआ और 15 फरवरी को यह 51000 पर पहुंच गया। पिछले वर्ष 23 मार्च को जब देश में लॉकडाउन लगा था तब से अब तक शेयर बाजार दोगुनी रफ़्तार से बढ़ा है।रिज़र्व बैंक की चिंता है की जब देश में व्यापार बंद पड़े थे तो शेयर बाजार में यह उछाल कैसे आ गया ?रिज़र्व बैंक का कहना है की पिछले वित्य वर्ष के दौरान देश की अर्थव्यवथा 8 फीसद कम हो गयी है और ऐसे में शेयर बाजार की यह बढ़त सामान्य नहीं है और यही कारण है की शेयर बाजार का यह बुलबुला कभी भी फट सकता है।

रिज़र्व बैंक को क्या समझ नहीं आया और क्यों ?
कोरोना जैसा संकट देश और दुनिया ने पहली बार देखा।जब देश में पूरी तरह लॉकडाउन लगा तो लोगों के लिए यह नया था।देश की जनता घर में बैठने को मजबूर हो गई।इस समय में देश में तीन वर्ग थे जिन पर इस लॉकडाउन का अलग अलग असर पड़ा।

1 मजदूर वर्ग
फैक्टरी,रियल स्टेट,देहाड़ी मजदूर और इस तरह के काम करके जीविका कमाने वाले लोगों पर लॉकडाउन का सबसे बुरा असर पड़ा और यही कारण था की सरकार को इनके लिए बड़े राहत पैकेज बनाने पड़े और तीन से छः महीने का राशन भी देना पड़ा और कुछ जगहों पर इनके अकाउंट में धन देने तक का काम सरकार ने किया।

2 अमीर या व्यापारिक वर्ग
देश की अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण अंग,इस वर्ग पर भी कोरोना का असर तो हुआ लेकिन जल्द ही सरकार ने जरुरी वस्तुओं की खरीद को सुनिश्चित करने के लिए इन्हें काम करने की अनुमति दी लेकिन कुछ नियमों को मानते हुए।यही कारण था की देश में पिछले एक साल में कभी भी जरुरी सामान की न तो कोई कमी आई और न ही कीमतों में वृद्धि हुई।देश में काम बहुत कम समय के लिए रुका लेकिन जल्द ही यह शुरू हो गया तो व्यापारी वर्ग को भी कोई ज्यादा नुकसान नहीं हुआ लेकिन कुछ व्यापार ऐसे भी थे जो बंद हो गए या उनके ऊपर बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ा।

3 मध्यम वर्गीय
यह वर्ग ऐसा है जिस पर इस लॉकडाउन का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा लेकिन यही वह वर्ग भी है जो इस समस्या से सबसे ज्यादा जल्दी बहार भी निकला और इसी वर्ग ने जीविका के नए तरीके भी खोजे।रिज़र्व बैंक को शेयर बाजार की बढ़त के पीछे जो नहीं दिख रहा वह यही वर्ग है जिसने अपनी सूझबूझ और समझ से न केवल शेयर बाजार बल्कि क्रिप्टो बाजार को भी अभूतपूर्व बढ़त दी।इस वर्ग के पास घर में बैठकर काम करने का एक विकल्प था और इस वर्ग ने इस समय का बहुत बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया। शेयर बाजार में शेयर की कीमत तब ऊपर जाती है जब निवेश होता है। शेयर किसी एक कंपनी का जरूर होता है और कंपनी का काम शेयर की कीमत में छलांग लगाने के लिए महत्वपूर्ण होता है लेकिन अगर कोई निवेश ही नहीं करेगा तो शेयर की कीमत भी कैसे बढ़ेगी ?घर में बैठ कर पैसे की जरुरत तो होती ही है और मध्यम वर्गीय परिवार के पास इतना पैसा नहीं होता की वह एक साल घर में बैठ कर खा सके और बाकि खर्चे भी चला सके।

इस दौरान इसी मध्यम वर्गीय परिवार ने अपने निवेश को शेयर और क्रिप्टो बाजार में निवेश किया।जिन लोगों ने बैंक में पैसा रखा था वह भी शेयर या क्रिप्टो में जाने लगा और इन दोनों ही क्षेत्रों में अभूतपूर्व बढ़त देखी गई।घर में रह कर और सुरक्षित तरीके से ट्रेडिंग के काम ने इस वर्ग को बुरे दौर से बहार निकाल लिया।शेयर बाजार में नया निवेशक आया और इस निवेशक ने शेयर बाजार को रफ़्तार दी।जो निवेशक तकनीक में कुछ ज्यादा बेहतर थे वह क्रिप्टो में आ गए और इन्होंने क्रिप्टो को 300% का उछाल दे दिया।

रिज़र्व बैंक को यह आसान सी बात समझ क्योकि नहीं आई ?इसके पीछे कारण है बैंकों में निवेश का न आना और बैंक से निवेश निकल कर नई जगह जाना जैसे की शेयर बाजार या क्रिप्टो।आज बैंक और रिज़र्व बैंक के सामने यह चिंता तो है ही की कैसे निवेशकों को अपने साथ बांध कर रखे ?क्या इस चेतावनी के पीछे यही एक कारण है ?क्रिप्टो को तो रिज़र्व बैंक पहले ही बुलबुला मान रहा था और अब शेयर बाजार भी बुलबुला बन गया।कोई भी निवेश जहा पर बैंक से ज्यादा फायदा मिलता है वह रिज़र्व बैंक के लिए बुलबुला है ?नई तकनीक को समझ कर साथ में चलने में ही भलाई है वर्ना कहीं बैंक का मजबूत बुलबुला न फट जाए।

#Bitcoin #wazirxwarriors #INDIAWANTSCRYPTO