17 जुलाई 2020 शुक्रवार

*सुभाष चंद्र गर्ग क्रिप्टो को करंसी मानने के पक्ष में नहीं हैं।
*देश में दूसरी करंसी लाने पर सजा के पक्ष में।
*क्रिप्टो को कॉमोडिटी,निवेश जैसी ट्रेड के पक्ष में।

खेतान एंड कंपनी ने क्रिप्टो के विषय पर आज एक वेबिनार आयोजित किया था जहां पर सुभाष चंद्र गर्ग ,निश्चल शेटी,सिद्धार्त सोगानी और कुछ कानून के विशेषज्ञ थे। यह वेबिनार 1 घंटे 45 मिनट का था जिसकी कुछ मुख्य बातें हम आपको यहां बता रहे हैं।
इस वेबिनार की सूत्रधार रश्मि देश पांडे थी, उन्होंने क्रिप्टो के बारे में कुछ जानकारी दी।उन्होंने बताया कि क्रिप्टो कोई नई नहीं है। यह भारत में मशहूर हुई 2017 के लगभग।दुनिया में 2000 से ज्यादा क्रिप्टो है।क्रिप्टो 85 बिलियन डॉलर का व्यापार है और अपने वाले समय की ट्रिलियन डॉलर मार्किट है।क्रिप्टो 2017 में बहुत ऊपर गई थी लेकिन कई देशों में रेगुलर न होने के कारण यह उतना आगे नहीं बढ़ पाई लेकिन फिर भी यह बहुत तेज गति से आगे बढ़ रही है। मार्च 2020 में 5.5 मिलियन उपभोगता थे क्रिप्टो के भारत में जो अगले तीन महीने में कई गुना बढ़ गए।वज़ीरएक्स ने ब्लॉकचेन और क्रिप्टो को आगे बढ़ाने के लिए 50 मिलियन डॉलर का निवेश रखा है।2017 में रिज़र्व बैंक का एक आदेश आया की रिज़र्व बैंक क्रिप्टो के लेनदेन के लिए बैंक के इस्तेमाल पर रोक लगा रहा है जो रोक सर्वोच्च न्यायालय ने बाद में हटा दी।सरकार इस बारे में एक बिल ला रही है।
इसके बाद श्री सुभाष चंद्र गर्ग वेबिनार में आए और उन्होंने मुद्रा और क्रिप्टो से सम्बंधित कई जानकारियां दी।उन्होंने कहा कि मुद्रा का डिजिटलीकरन हो रहा है लेकिन इसका आधार कागज़ी मुद्रा होगी।सुभाष गर्ग ने कहा कि किसी चीज़ की बढ़ती कीमत निवेशकों की आँखों में धूल झोंक सकती है।उनका कहना था कि यह बड़े लोगों के निवेश की वस्तु है और आम आदमी इसमें निवेश नहीं कर सकता।
यहां यह समझने वाली बात है कि शायद सही जानकारी का आभाव है क्योंकि क्रिप्टो एक ऐसा निवेश है जहां पर आप 1.50 रुपये का मैटिक या 10 रुपये का वज़ीरएक्स टोकन भी ले कर निवेश कर सकते हैं तो हम शुभाष जी की इस बात से सहमत नहीं हैं।
उन्होंने आगे कहा कि क्रिप्टो को कोई भी बना सकता है और कोई भी अपनी क्रिप्टो को बाजार में ला सकता है।इसकी कीमत को दिखा कर लोगों को निवेश का झांसा दिया जा सकता है।
सुभाष गर्ग जी से रश्मि देश पांडे ने जब क्रिप्टो को रखने पर 10 साल की सजा और 25 करोड़ का जुर्माना करने के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि “किसी देश की मुद्रा को बनाने,चलाने और इसके बारे में निर्णय लेने का अधिकार सिर्फ रिज़र्व बैंक को है और अगर कोई इसके बदले दूसरी करंसी की बात करता है तो यह नकली नोट बनाने की तरह है जो एक जुर्म है और इसकी सजा ऐसी ही होनी चाहिए।

इसके बाद इस बातचीत में वज़ीरएक्स के संस्थापक निश्चल शेटी जुड़े- उन्होंने बताया कि क्रिप्टो या ब्लॉकचेन कई समस्याओं का समाधान है और एक ब्लॉकचेन को काम करने के बदले जो मेहनताना(पेमेंट) दी जाती है वह क्रिप्टो से ही दी जा सकती है जैसे एथेरिम की ब्लॉकचेन का इस्तेमाल करके स्मार्ट कॉट्रैक्ट बनाने के लिए गैस फीस के तौर पर डिजिटल टोकन ही देना पड़ता है जो क्रिप्टो से ही संभव है।निश्चल ने देश में लोन पर ब्याज दर का विदेश की ब्याज दर से भी तुलनात्मक विश्लेषण किया।निश्चल ने सुभाष गर्ग की बात पर कहा कि हमारा क्रिप्टो को रेगुलर करने से उद्देश्य देश की मुद्रा को हटा कर क्रिप्टो को लाने से नहीं है।भारत सरकार के प्रयोजित बिल के बारे में निश्चल ने तर्क दिए।
इसके बाद सिद्धार्त सोगानी वेबिनार में आए और उनका कहना था कि क्रिप्टो अभी बिल्कुल नया विषय है और इसके बारे में कोई भी निर्णय लेने से पहले इसे समझना जरूरी है।अगर क्रिप्टो को सही तरीके से नहीं समझाया या समझ गया तो यह सही नहीं होगा।अभी क्रिप्टो बहुत धीमी रफ्तार में चल रही है और जैसे एक कार अगर 20 या 30 से गति से चल रही हो तो उस पर ज्यादा ध्यान केंद्रित नहीं करना पड़ता लेकिन इसकी गारी तेज होने पर अपने आप ध्यान केंद्रित हो जाता है वैसा ही क्रिप्टो के साथ है हमें इसे रफ्तार देने की जरूरत है।सिद्धार्त का भी कहना है कि क्रिप्टो लीगल करना जरुरी है इस से डरने की जरुरत नहीं है बल्कि इसे समझ कर इसकी मदद करके इसके साथ आगे बढ़ा जा सकता है।
सुभाष गर्ग की सारी बातों को अगर ध्यान से सुने तो समझ में आता है कि उनके अनुसार क्रिप्टो में मुद्रा जैसे कोई गुण नहीं है और एक देश में दो मुद्राएं नहीं हो सकती लेकिन क्रिप्टो को शेयर या निवेश का माध्यम माना जा सकता है फिर यह लोगों पर निर्भर होगा की वह अपनी कमाई को इसमें लगाए या नहीं।
इस वेबिनार की संचालिका निश्चल से TCS का क्रिप्टो बाजार में आने के विषय पर कुछ पूछना चाहतीं थी लेकिन शुभाष गर्ग ने समय की कमी के कारण और अधिक न रुक पाने की असमर्थता जताई जिस कारण इस वेबिनार को वही खत्म करना पड़ा।

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