26 मार्च 2022 शनिवार (क्रिप्टो न्यूज़ हिंदी)

काफी लम्बे समय से सरकार जिस क्रिप्टो टैक्स की बात कर रही थी उसे कल यानि शुक्रवार को लोकसभा में पास कर दिया गया। इस नए क्रिप्टो टैक्स के अंतर्गत अब किसी भी तरह के क्रिप्टो मुनाफे पर आयकर 30% और क्रिप्टो लेनदेन पर 1% टीडीएस देना होगा। कुछ बातों को ले कर अभी यहाँ बहुत विरोधाभास है। 1% हर बार क्रिप्टो खरीदने और बेचने पर देना होगा या क्रिप्टो खरीदने के बाद जब बेचेंगे तब यह टीडीएस देना होगा। 1% टीडीएस के बारे में सोशल मीडिया पर कुछ लोगो का कहना है कि यह तब देना होगा जब हम अपनी क्रिप्टो को भारतीय मुद्रा में बदल कर अपने बैंक अकाउंट में लेंगे लकिन ऐसा है नहीं। इस विषय पर हमने कुछ क्रिप्टो विशेषज्ञों से ट्विटर पर पूछा था लेकिन अभी यह किसी को भी सही तरीके से शायद नहीं पता।

वित्तीय मंत्री ने अपने भाषण में कहा कि यह 1% टीडीएस लगाने का मक्सद राजस्व कमाना नहीं बल्कि इस बात की गणना रखना है कि कितना ट्रांजक्शन हुआ है। हम वित्तीय मंत्री की इस बात से बिल्कुल भी सहमत नहीं हैं, क्योंकि हिसाब ही रखना है तो वह तो कम से कम टैक्स रख कर भी किया जा सकता है और वैसे भी एक्सचेंज के पास तो सारा डाटा होता ही है तो इस टैक्स का कोई मतलब ही नहीं बना। यह 1% टीडीएस 30% आयकर से भी ज्यादा खतरनाक है। इस एक टैक्स के कारण एक्सचेंज पर ट्रेड वॉल्यूम में बहुत बड़ी गिरावट आएगी। क्रिप्टो एक्सचेंज का काम बढ़ेगा और लोग ट्रेड करने से बचेंगे।

एक और असमंजस है 1% टीडीएस को ले कर, इस टीडीएस का रिकॉर्ड भारतीय एक्सचेंज पर रखना तो आसान होगा लेकिन विदेशी एक्सचेंज पर यह कैसे काम करेगा यह भी अभी एक बड़ा प्रश्न है। सरकार को इन दोनों ही टैक्स के लिए पूरी तरह से ट्रेडर्स और निवेशक की ईमानदारी पर निर्भर रहना होगा क्योंकि क्रिप्टो में ऐसे बहुत से तरीके हैं जहां से कमाई तो होती है लेकिन इसका कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता।

कल इस बिल को पेश करने के दौरान आंबेडकर नगर से BSP के लोकसभा सदस्य श्री रितेश पांडेय ने 1% टीडीएस के नुक्सान बताते हुआ कहा की “NFT खरीदते या बेचते समय ब्लॉकचेन पर तीन बार ट्रांजक्शन कारण पड़ता है और हर बार ट्रांजक्शन पर 1% टीडीएस के हिसाब से एक NFT के लिए 3% टैक्स हो जाएगा।  यह सही बात भी है, अगर हर ट्रांजक्शन पर 1% टीडीएस होगा तो DEX पर ट्रेड करने पर कम से कम दो बार टीडीएस लगेगा एक ट्रेड को पूरा करने पर।

भारतीय जनता पार्टी गोंड्डा से पक्ष के लोकसभा सदस्य श्री निशिकांत दुबे ने कहा कि क्रिप्टो हवाला का दूसरा रूप है और यह केवल डार्कवेब और ड्रग्स के लिए इस्तेमाल होता है। इनकी बात सुन कर ही पता लग रहा है कि सरकार का होमवर्क और क्रिप्टो ज्ञान ज़ीरो है। सिर्फ बोलने से बात सच्ची नहीं हो जाती, क्या सरकार एक ऐसी आतंकवादी घटना बता सकती है जहां क्रिप्टो से कोई लेनदेन हुआ हो? अगर हवाला का दूसरा रूप क्रिप्टो है तो पहला रूप क्या है और उस पर प्रतिबन्ध क्यों नहीं? कल सत्ता पक्ष के मंत्री एक भाषण रट कर आए थे और बिना तर्क के कुछ भी बोले जा रहे थे। इनका कहना था कि हम 2012 से क्रिप्टो को देख रहे हैं और इसका इस्तेमाल गैरकानूनी कामों के लिए होता है तो यह सरकार अभी तक सो रही थी क्या ? अभी तक सरकार ने क्रिप्टो को बैन क्यों नहीं किया ? अब भी सरकार बैन नहीं कर रही बल्कि कह रही है आप क्रिप्टो का इस्तेमाल करो लेकिन टैक्स दो। मतलब सरकार यह जानती है कि क्रिप्टो गैरकानूनी काम के लिए इस्तेमाल होती है फिर भी इस्तेमाल करने की अनुमति क्यों?

सरकार ने अगर क्रिप्टो का थोड़ा सा भी ज्ञान लिया होता तो कल सदन में यह सभी मंत्री इस तरह की बातें न करते। क्रिप्टो जैसे पढ़े लिखे लोगों के क्षेत्र को सरकार लॉटरी, सट्टे, जुआ और घुड़दौड़ जैसे कामों से तुलना कर यही है। बी टेक् करने के बाद क्रिप्टो और ब्लॉकचेन के प्रोजेक्ट डेवेलप करने वालों को जुआरी और सट्टेबाज़ की तरह देखा जा रहा है।

सरकार का यह फैसला भारतीय क्रिप्टो बाजार के लिए जहर का काम करेगा जो इस क्षेत्र को धीरे धीरे खत्म कर देगा। पूरी दुनिया में जिस भारत के ब्लॉकचेन डेवेलपर्स का नाम है उस भारत के डेवेलपर्स बेरोजगार हो जाएंगे और इसकी जिम्मेवार यह सरकार और सरकारी नीतियां हैं।

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