ED का नया फोकस Crypto Fraud और मनी लॉन्ड्रिंग
Crypto Fraud और मनी लॉन्ड्रिंग पर ED का नया फोकस
डिजिटल दौर में जहां तकनीक ने सुविधाएं बढ़ाई हैं, वहीं आर्थिक अपराधों के नए रास्ते भी खोल दिए हैं। इसी बदलते परिदृश्य को देखते हुए Enforcement Directorate (ED) ने अब क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े अपराधों पर अपनी पकड़ मजबूत करने का फैसला किया है।
ED के 70वें स्थापना दिवस पर डायरेक्टर Rahul Navin ने साफ किया कि एजेंसी अब पारंपरिक घोटालों से आगे बढ़कर ‘साइबर-सक्षम वित्तीय अपराधों’ पर ध्यान केंद्रित करेगी। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि भारत में डिजिटल मनी लॉन्ड्रिंग और Crypto Fraud तेजी से बढ़ रहे हैं और अब उन्हें नियंत्रित करना प्राथमिकता बन चुका है।

Source – Sapna Singh X Post
बदलता अपराध परिदृश्य और नए खतरे
ED की हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अपराधियों ने अब पुराने बैंकिंग तरीकों को छोड़कर क्रिप्टोकरेंसी और वर्चुअल डिजिटल एसेट्स का उपयोग शुरू कर दिया है। 2025-26 के दौरान 250 से अधिक ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें ऑनलाइन फ्रॉड और डिजिटल मनी लॉन्ड्रिंग शामिल है।
इन मामलों में सबसे ज्यादा देखने को मिला है फर्जी इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म्स और ‘पिग बुचरिंग’ जैसे स्कैम, जहां पहले भरोसा बनाया जाता है और फिर बड़े रिटर्न का लालच देकर निवेश करवाया जाता है।
जांच में कई नकली वेबसाइट्स सामने आई हैं, जो असली क्रिप्टो प्लेटफॉर्म जैसी दिखती थीं। ये साइट्स लोगों को हर महीने 10% तक रिटर्न का वादा करती थीं, लेकिन असल में यह एक जाल था।
इससे साफ होता है कि अब अपराध केवल तकनीकी नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक भी हो गए हैं, जहां लोगों के भरोसे और लालच का इस्तेमाल किया जा रहा है।
क्रिप्टो लॉन्ड्रिंग का तरीका और ED की कार्रवाई
ED ने अपनी जांच में पाया कि अपराधी अब P2P ट्रांसफर के जरिए भारतीय रुपये को USDT जैसे डिजिटल टोकन में बदलते हैं और फिर उसे विदेशी वॉलेट्स में भेज देते हैं। इस प्रक्रिया से पैसे का ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
इसके अलावा, क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग अब पारंपरिक हवाला नेटवर्क के विकल्प के रूप में भी किया जा रहा है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैसे का तेजी से ट्रांसफर संभव हो जाता है।
इन गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए ED ने 2025-26 में बड़े स्तर पर कार्रवाई की है। एजेंसी ने ₹35,000 करोड़ से अधिक की संदिग्ध संपत्तियों की पहचान की है और उनमें से ₹12,000 करोड़ से ज्यादा को जब्त या अटैच किया गया है।
हाल ही में चर्चित BitConnect स्कैम से जुड़े हजारों करोड़ के क्रिप्टो एसेट्स को भी फ्रीज किया गया है। इसके साथ ही, दर्जनों फर्जी वेबसाइट्स का पर्दाफाश किया गया है जो निवेशकों को ठगने के लिए बनाई गई थीं।
चार्जशीट दाखिल करने के मामले में भी ED ने तेजी दिखाई है, और इस साल सैकड़ों मामलों में कार्रवाई की गई है।
नई तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
क्रिप्टो अपराधों की जटिलता को देखते हुए ED अब अपनी जांच पद्धति को भी आधुनिक बना रहा है। एजेंसी ब्लॉकचेन एनालिसिस और डिजिटल फॉरेंसिक जैसी तकनीकों का उपयोग कर रही है, जिससे लेनदेन की गहराई से जांच की जा सके।
इसके अलावा, क्रिप्टो एक्सचेंजों के साथ सहयोग बढ़ाया जा रहा है ताकि संदिग्ध ट्रांजैक्शनों को जल्दी पहचाना जा सके।
क्योंकि अधिकांश Crypto Fraud सीमा पार संचालित होते हैं, इसलिए ED अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ भी मिलकर काम कर रहा है। इसमें अमेरिकी FBI जैसी एजेंसियों के साथ सहयोग शामिल है, जिससे ग्लोबल स्तर पर नेटवर्क को तोड़ा जा सके।
यह सहयोग इस बात को दर्शाता है कि क्रिप्टो अपराध अब केवल एक देश की समस्या नहीं, बल्कि एक वैश्विक चुनौती बन चुके हैं।
कन्क्लूजन
Enforcement Directorate का यह नया फोकस डिजिटल युग में कानून प्रवर्तन की बदलती रणनीति को दर्शाता है। क्रिप्टोकरेंसी के बढ़ते उपयोग के साथ-साथ उससे जुड़े जोखिम भी बढ़े हैं, और अब उन्हें नियंत्रित करना जरूरी हो गया है।
ED की सख्ती और नई तकनीकों के उपयोग से यह उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले समय में ऐसे फ्रॉड्स पर लगाम लगेगी।
निवेशकों के लिए भी यह एक संकेत है कि वे किसी भी ऑनलाइन निवेश से पहले पूरी जांच करें और अनजान प्लेटफॉर्म्स से दूर रहें। डिजिटल दुनिया में सुरक्षा अब सिर्फ विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुकी है। क्रिप्टो मार्केट से जुडी इसी तरह की न्यूज़ के लिए आप हमारी वेबसाइट के Crypto News Hindi Section पर क्लिक कर सकते हैं।



